चीर हरण
GlyphSignal keeps some article pages out of search while editorial context is expanded.
यह क्यों ट्रेंड कर रहा है
Interest in “चीर हरण” spiked on Wikipedia on 2026-07-21.
When a Wikipedia article trends this sharply, it usually reflects a noteworthy real-world event—whether breaking news, a cultural milestone, or a viral discussion driving collective curiosity.
By monitoring millions of daily Wikipedia page views, GlyphSignal helps you spot cultural moments as they happen and understand the stories behind the numbers.
मुख्य बातें
- दुर्योधन द्वारा पांडवों का अपमान खाण्डव वन के दहन के समय अर्जुन ने मय दानव को अभय दान दे दिया था। इससे कृतज्ञ हो कर मय दानव ने अर्जुन से कहा, "हे कुन्तीनन्दन!
- " अर्जुन ने उत्तर दिया, "मैं किसी बदले की भावना से उपकार नहीं करता, किन्तु यदि तुम्हारे अन्दर सेवा भावना है तो तुम श्रीकृष्ण की सेवा करो।" मयासुर के द्वारा किसी प्रकार की सेवा की आज्ञा माँगने पर श्री कृष्ण ने उससे कहा, "हे दैत्यश्रेष्ठ!
Source note: This page combines GlyphSignal analysis with attributed reference material from Wikipedia. GlyphSignal adds trend context, traffic history, categorization, and editorial interpretation. See how we build these pages.
Source summary
Wikipediaखाण्डव वन के दहन के समय अर्जुन ने मय दानव को अभय दान दे दिया था। इससे कृतज्ञ हो कर मय दानव ने अर्जुन से कहा, "हे कुन्तीनन्दन! आपने मेरे प्राणों की रक्षा की है अतः आप आज्ञा दें, मैं आपकी क्या सेवा करूँ?" अर्जुन ने उत्तर दिया, "मैं किसी बदले की भावना से उपकार नहीं करता, किन्तु यदि तुम्हारे अन्दर सेवा भावना है तो तुम श्रीकृष्ण की सेवा करो।" मयासुर के द्वारा किसी प्रकार की सेवा की आज्ञा माँगने पर श्री कृष्ण ने उससे कहा, "हे दैत्यश्रेष्ठ! तुम युधिष्ठिर की सभा हेतु ऐसे भवन का निर्माण करो जैसा कि इस पृथ्वी पर अभी तक न निर्मित हुआ हो।" मयासुर ने श्री कृष्ण की आज्ञा का पालन करके एक अद्वितीय भवन का निर्माण कर दिया। इसके साथ ही उसने पाण्डवों को देवदत्त शंख, एक वज्र से भी कठोर रत्नजटित गदा तथा मणिमय पात्र भी भेंट किया।
कुछ काल पश्चात् धर्मराज युधिष्ठिर ने राजसूय यज्ञ का सफलतापूर्वक आयोजन किया। यज्ञ के आयोजन के पहले भीम के द्वारा जरासंध का वध हुआ एवं यज्ञ के दौरान शिशुपाल का वध हुआ। यज्ञ के समाप्त हो जाने के बाद भी कौरव राजा दुर्योधन अपने भाइयों के साथ युधिष्ठिर के अतिथि बने रहे। एक दिन दुर्योधन ने मय दानव के द्वारा निर्मित राजसभा को देखने की इच्छा प्रदर्शित की जिसे युधिष्ठिर ने सहर्ष स्वीकार किया। दुर्योधन उस सभा भवन के शिल्पकला को देख कर आश्चर्यचकित रह गया। मय दानव ने उस सभा भवन का निर्माण इस प्रकार से किया था कि वहाँ पर अनेक प्रकार के भ्रम उत्पन्न हो जाते थे जैसे कि स्थल के स्थान पर जल, जल के स्थान पर स्थल, द्वार के स्थान दीवार तथा दीवार के स्थान पर द्वार दृष्टिगत होता था। दुर्योधन को भी उस भवन के अनेक स्थानों में भ्रम हुआ तथा उसे चार पांडवो के उपहास का पात्र बनना पड़ा|द्रौपदी द्वारा दुर्योधन का अपमान करने की कथा सर्वथा मिथ्या है |
Content sourced from Wikipedia under CC BY-SA 4.0