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धोलावीरा

धोलावीरा

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Reviewed by GlyphSignal·Updated 2026-06-03·Methodology·Disclosure·Source·Contact

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धोलावीरा ( गुजराती; ધોળાવીરા) भारत के गुजरात राज्य के कच्छ ज़िले की भचाऊ तालुका में स्थित एक पुरातत्व स्थल है। इसका नाम यहाँ से एक किमी दक्षिण में स्थित ग्राम पर पड़ा है, जो राधनपुर से 165 किमी दूर स्थित है। धोलावीरा में सिन्धु घाटी सभ्यता के अवशेष और खण्डहर मिलते हैं और यह उस सभ्यता के सबसे बड़े ज्ञात नगरों में से एक था। यह मात्र एक ऐसा पुरातत्व स्थल है जो यूनेस्को में शामिल किया गया है इस पुरातत्व स्थल को धोलावीरा गांव के निवासी शंभूदान गढ़वी  ने 1960 के दशक के प्रारम्भ में खोजा था, जिन्होंने इस स्थान पर सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए वर्षों तक प्रयास किये। भौगोलिक रूप से यह कच्छ के रण पर विस्तारित कच्छ मरुभूमि वन्य अभयारण्य के भीतर खादिरबेट द्वीप पर स्थित है। यह नगर 47 हेक्टर (120 एकड़) के चतुर्भुजीय क्षेत्रफल पर फैला हुआ था। बस्ती से उत्तर में मनसर जलधारा और दक्षिण में मनहर जलधारा है, जो दोनों वर्ष के कुछ महीनों में ही बहती हैं। यहाँ पर आबादी लगभग 2650 ईसापूर्व में आरम्भ हुई और 2100 ईपू के बाद कम होने लगी। कुछ काल इसमें कोई नहीं रहा लेकिन फिर 1450 ईपू से फिर यहाँ लोग बस गए। नए अनुसंधान से संकेत मिलें हैं कि यहाँ अनुमान से भी पहले, 3500 ईपू से लोग बसना आरम्भ हो गए थे और फिर लगातार 1800 ईपू तक आबादी बनी रही। धोलावीरा पांच हजार साल पहले विश्व के सबसे व्यस्त महानगर में गिना जाता था था। इस हड़प्पा कालीन शहर धोलावीरा को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में (2021 चीन में संपन्न यूनेस्को की ऑनलाइन बैठक में) शामिल किया गया है। यह भारत का 40वां विश्व धरोहर स्थल है(march 2022 तक कोई नयी साईट नही खोजी गई है यह नवीनतम है)।

धोलावीरा (गुजराती: ધોળાવીરા) पश्चिम भारत के गुजरात राज्य के कच्छ जिले के भचाऊ तालुका के खदिरबेट में स्थित एक पुरातात्विक स्थल है, जिसने 1 किलोमीटर (0.62 मील) दक्षिण में स्थित एक आधुनिक गाँव से अपना नाम लिया है। यह गाँव राधनपुर से 165 किलोमीटर (103 मील) दूर है। स्थानीय रूप से कोटदा टिंबा के नाम से भी जाना जाता है, यह स्थल प्राचीन सिंधु घाटी सभ्यता के एक शहर के खंडहरों को समेटे हुए है। भूकंपों ने बार-बार धोलावीरा को प्रभावित किया है, जिसमें लगभग 2600 ईसा पूर्व एक विशेष रूप से गंभीर भूकंप शामिल है।

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