पंचलाइट
फणीश्वर नाथ 'रेणु' द्वारा लिखी गई हिंदी कहानी
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Source summary
Wikipediaपंचलाइट एक हिन्दी कहानी है जिसके लेखक फणीश्वर नाथ रेणु हैं। यह कहानी रेणु के कहानी संग्रह 'ठुमरी' में संकलित है। यह कहानी आंचलिक कहानियों कि श्रेणी में एक प्रमुख कहानी मानी जाती है। यह कहानी 1950 से 1960 के मध्य लिखी गयी थी यह उत्तर प्रदेश और बिहार में हिन्दी साहित्य के कई पाठ्यक्रमों में भी शामिल है।
यह कहानी बिहार के ग्रामीण परिवेश के गिर्द घूमती है। गाँव के एक युवक गोधन का मुनरी नामक लड़की से प्रेम है जिससे नाराज़ होकर पंचायत ने उसका बहिष्कार कर रखा है। एक दिन मेले से गाँव वाले सार्वजनिक उपयोग के लिये पेट्रोमैक्स (जिसे वहाँ के लोग अंगिका में पंचलाइट या पंचलैट कहते हैं) खरीद कर लाते हैं। सभी उत्साह में हैं लेकिन तभी पता चलता है कि इसे जलाना तो किसी को आता ही नहीं। गाँववालों के भोलापन और पेट्रोमैक्स जलाना न आने के कारण हास्य की स्थिति पैदा होती है। दूसरे गाँव के लोग उपहास करने लगते है। तब मुनरी अपनी सहेली के माध्यम से पंचों से कहलवाती है कि गोधन को आता है पंचलाइट जलाना। पंच लोग दूसरे गाँव से पंचलाइट जलाने के लिये किसी को बुलाने की बेइज्ज़ती से बचने के लिये अंततः गोधन को माफ कर देते हैं और उसका हुक्का-पानी बहाल कर दिया जाता है। और उसे सनीमा का गाना गाने की छूट भी मिल जाती है। पंचलाइट कहानी में जाति के आधार पर ग्रामीण समाज विभिन्न टोलियो में विभाजित है
रेणु की इस कहानी का नाटक के रूप में मंचन इस इलाके में काफ़ी प्रचलित है। इसका मंचन प्रोफेशनल कलाकारों द्वारा भी हुआ है। इस कहानी पर एक लघु-फ़िल्म भी बनी है
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