भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार
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Source summary
Wikipediaभारत के राष्ट्रीय अभिलेखागार में भारत सरकार के अप्रचलित अभिलेखों का भंडारण किया जाता है। इसका प्रयोग अधिकतर प्रशासकों और शोधार्थियों के द्वारा किया जाता है। यह भारत सरकार के पर्यटन और संस्कृति मंत्रालय से संबद्ध एक कार्यालय है। इसकी शुरुआत कलकत्ता (अब कोलकाता) में मार्च 1891 में इंपीरियल रिकॉर्ड डिपार्टमेंट की स्थापना के साथ हुई थी। 1911 में जब राष्ट्रीय राजधानी को कलकत्ता से बदलकर नई दिल्ली किया गया उस समय इस अभिलेखागार को भी नई दिल्ली स्थानानांतरित कर दिया गया। अपने वर्तमान भवन में यह सन 1926 में स्थानानांतरित हुआ। यह अभिलेखागार 'प्रथमोक्त' नाम से नई दिल्ली के जनपथ और कर्तव्यपथ के चौक के पास लाल और सफ़ेद पत्थरों के एक भव्य भवन में स्थित है। प्राकृतिक कारकों से अभिलेखों की रक्षा के लिए आधुनिक वैज्ञानिक साधन उपलब्ध कराये गए हैं।
इस विभाग को सन् 1891 में ईस्ट इंडिया कंपनी के समय से इकट्ठे हुए सरकारी अभिलेखों को लेकर रखने का काम सौंपा गया था। उस समय इसके अधिकारी स्पष्ट रूप से यह नहीं जानते थे कि, इसका क्या काम होगा? अभिलेखसमूह अव्यवस्थित अवस्था में पड़ा था। भारत सरकार का ध्यान इस ओर तब गया जब इंग्लैंड और वेल्स के अभिलेखों के संबंध में नियुक्त राजकीय आयोग ने सन् 1914 में भारतीय अभिलेखों की अव्यवस्थित अवस्था पर टिप्पणी की। फलत: सन् 1919 में भारत सरकार ने भारतीय अभिलेखों के संबंध में अपनी सिफारिशें भेजने के लिए एक भारतीय ऐतिहासिक अभिलेख आयोग नियुक्त किया। उस आयोग की सिफारिशों के फलस्वरूप अभिलेखों की अवस्था में धीरे धीरे सुधार होता गया। आज इसका मुख्य काम, सरकार के स्थायी अभिलेखों को सँभालकर रखना तथा प्रशासनिक उपयोग के लिए माँगने पर सरकार के विभिन्न कार्यालयों को उपलब्ध कराना। इसका दूसरा प्रमुख कार्य, सरकार द्वारा निश्चित अवधि तक के अभिलेख, शोधार्थियों को शोधाकार्य के लिए उपलब्ध कराना। शोधार्थी अभिलेखागार के शोधकक्ष (रिसर्च रूम) में बैठकर शोधकार्य करते है।
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