GlyphSignal
भूमंडलीय ऊष्मीकरण

भूमंडलीय ऊष्मीकरण

पृथ्वी के औसत तापमान में वर्तमान वृद्धि और मानव निर्मित गैसोक्राइन प्रक्रियाओं के कारण मौसम के

2 मिनट पढ़ें
Reviewed by GlyphSignal·Updated 2026-06-04·Methodology·Disclosure·Source·Contact

GlyphSignal keeps some article pages out of search while editorial context is expanded.

यह क्यों ट्रेंड कर रहा है

Interest in “भूमंडलीय ऊष्मीकरण” spiked on Wikipedia on 2026-06-04.

Sudden spikes in Wikipedia readership generally point to a newsworthy event or emerging public conversation that piques widespread curiosity.

At GlyphSignal we surface these trending signals every day—transforming Wikipedia’s vast pageview data into actionable insights about global curiosity.

2026-05-06शिखर: 702026-06-04
30-दिन कुल: 596

Source note: This page combines GlyphSignal analysis with attributed reference material from Wikipedia. GlyphSignal adds trend context, traffic history, categorization, and editorial interpretation. See how we build these pages.

Source summary

Wikipedia

भूमण्डलीय उष्णता का अर्थ धरती के वायुमण्डल और महासागर के औसत तापमान में २०वीं शताब्‍दी से हो रही वृद्धि और उसकी अनुमानित निरन्तरता है। पृथ्‍वी के वायुमण्डल के औसत तापमान में 2005 तक 100 वर्षों के दौरान 0.74 ± 0.18 °C (1.33 ± 0.32 °F) की वृद्धि हुई है। जलवायु परिवर्तन पर बैठे अन्तर-सरकार पैनल ने निष्कर्ष निकाला है कि " 20वीं शताब्दी के मध्य से संसार के औसत तापमान में जो वृद्धि हुई है उसका मुख्य कारण मनुष्य द्वारा निर्मित ग्रीनहाउस गैसें हैं।

जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, धरती के वातावरण के तापमान में लगातार हो रही विश्वव्यापी बढ़ोतरी को 'भूमण्डलीय ऊष्मीकरण' कहा जा रहा है। हमारी धरती सूर्य की किरणों से ऊष्मा प्राप्त करती है। ये किरणें वायुमण्डल से गुजरती हुईं धरती की सतह से टकराती हैं और फिर वहीं से परिवर्तित होकर पुन: लौट जाती हैं। धरती का वायुमण्डल कई गैसों से मिलकर बना है जिनमें कुछ ग्रीनहाउस गैसें भी शामिल हैं। इनमें से अधिकांश धरती के ऊपर एक प्रकार से एक प्राकृतिक आवरण बना लेती हैं जो लौटती किरणों के एक हिस्से को रोक लेता है और इस प्रकार धरती के वातावरण को गर्म बनाए रखता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि ग्रीनहाउस गैसों में बढ़ोतरी होने पर यह आवरण और भी सघन या मोटा होता जाता है। ऐसे में यह आवरण सूर्य की अधिक किरणों को रोकने लगता है और फिर यहीं से शुरू हो जाते हैं ग्लोबल वार्मिंग के दुष्प्रभाव।

आईपीसीसी द्वारा दिये गये जलवायु परिवर्तन के मॉडल इंगित करते हैं कि धरातल का औसत ग्लोबल तापमान २१वीं शताब्दी के दौरान और अधिक बढ़ सकता है। सारे संसार के तापमान में होने वाली इस वृद्धि से समुद्र के स्तर में वृद्धि, चरम मौसम (extreme weather) में वृद्धि तथा वर्षा की मात्रा और रचना में महत्त्वपूर्ण बदलाव आ सकता है। ग्लोबल वार्मिंग के अन्य प्रभावों में कृषि उपज में परिवर्तन, व्यापार मार्गों में संशोधन, ग्लेशियर का पीछे हटना, प्रजातियों के विलुप्त होने का खतरा आदि शामिल हैं।

Read full article on Wikipedia →

Content sourced from Wikipedia under CC BY-SA 4.0

शेयर

Keep Reading

2026-06-04
2
है जवानी तो इश्क होना है डेविड धवन द्वारा निर्देशित एक आगामी भारतीय हिंदी भाषा की हास्य प्रेमकहानी फ...
4,056 दृश्य
3
धर्मेन्द्र प्रधान एक भारतीय राजनीतिज्ञ तथा वर्तमान में भारत सरकार के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस तथा...
3,003 दृश्य
धर्मेंद्र प्रधान
4
विश्व पर्यावरण दिवस पर्यावरण की सुरक्षा और संरक्षण हेतु पूरे विश्व में 5 जून को मनाया जाता है। वर्ष ...
2,559 दृश्य
विश्व पर्यावरण दिवस
5
अभिजीत दिपके एक भारतीय राजनीतिक संचार रणनीतिकार और कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक हैं, जो भ...
1,845 दृश्य
अभिजीत दीपके
6
मिया खलीफा लेबनानी-अमेरिकी मीडिया हस्ती और पूर्व पोर्नोग्राफ़िक फ़िल्म अभिनेत्री हैं। 2014 में, उन्ह...
1,406 दृश्य
मिया खलीफ़ा
7
खाटू श्याम जी मंदिर भारत के राजस्थान राज्य के सीकर जिले के खाटू गांव में स्थित एक प्रसिद्ध हिंदू मंद...
1,097 दृश्य
खाटूश्यामजी
8
दूरदर्शन भारत का सरकारी दूरदर्शन प्रणाल (चैनल) है। यह भारत सरकार द्वारा नामित पर्षद् प्रसार भारती के...
1,073 दृश्य
दूरदर्शन (चैनल)
Continue reading: