मलिक अंबर
भारतीय योद्धा (1549- 1626)
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Source summary
Wikipediaमलिक अंबर का जन्म संभवत: 1549 में एक हब्शी परिवार में हुआ। बाल्यकाल में ही उसे दास बनाकर बगदाद के बाजार में ले जाकर ख्वाजा पीर बगदाद के हाथों बेचा गया। ख्वाज़ा मलिक अंबर के साथ दक्षिण भारत गया जहाँ उसे मुर्तज़ा निजामशाह प्रथम के मंत्री चंगे़ज खाँ ने खरीद लिया। मलिक अंबर की बुद्धि कुशाग्र, प्रकृति प्रतिभायुक्त और उदार थी, अत: उसे अन्य गुलामों की अपेक्षा ख्याति पाने में देर न लगी। चंगेज खाँ के संरक्षण में रहकर निज़ामशाही राजनीति तथा सैनिक प्रबंध को समझने का उसको अवसर प्राप्त हुआ। चंगेज खाँ की आकस्मिक मृत्यु होने के कारण वह कुछ समय तक इधर-उधर निजामशाही राज्य में ठोकरें खाता रहा। निजामशाही राज्य पर काले बादलों को आच्छादित होते देखकर तथा दलबंदी के संताप और मुगलों के निरंतर आक्रमणों से भयभीत होकर ख्याति पाने की आशा से वह बीजापुर और गोलकुंडा गया परंतु जब इन राज्यों में भी यथेष्ट सुअवसर प्राप्त न हुआ तक वह अन्य हब्शियों के साथ फिर अहमदनगर लौट आया। वह सेना में भरती हुआ और पूनः सकी शादी हुई एक दहुना नाम की औरत से फिर अमँग खाँ ने 150 अश्वारोहियों का सरदार नियुक्त किया। वह अपने आश्रयदाता के साथ चुनार पहुँचा और उसने मुगल आक्रमणकारियों को परेशान करना प्रारंभ किया। शत्रु के शिविरों पर छापा मारकर वह रसद लूट लेता था और उसके प्रदेश में घुस पड़ता था। इस प्रकार धीरे-धीरे उसकी ख्याति बढ़ने लगी।
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