रावण
प्रमुख हिन्दू-ग्रंथ रामायण का एक केन्द्रीय पात्र
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Source summary
Wikipediaरावण रामायण का एक प्रमुख प्रतिचरित्र है। रावण लंका का राजा था। रावण श्री राम के परम शत्रु थे अपने दस सिरों के कारण भी जाना जाता था, जिसके कारण उसका नाम दशानन (दश = दस + आनन = मुख) | किसी भी कृति के लिये नायक के साथ ही सशक्त खलनायक का होना अति आवश्यक है। किंचित मान्यतानुसार रावण में अनेक गुण भी थे। सारस्वत ब्राह्मण महर्षि पुलस्त्य ऋषि का पौत्र और विश्रवा का पुत्र रावण एक परम भगवान शिव भक्त, उद्भट राजनीतिज्ञ, महाप्रतापी, महापराक्रमी योद्धा, अत्यन्त बलशाली, शास्त्रों का प्रखर ज्ञाता, प्रकाण्ड विद्वान, पण्डित एवं महाज्ञानी था। रावण के शासन काल में लंका का वैभव अपने चरम पर था और उसने अपना महल पूरी तरह स्वर्ण रजित बनाया था, इसलिए उसकी लंकानगरी को सोने की लंका अथवा सोने की नगरी भी कहा जाता है। रावण का विवाह मन्दोदरी से हुआ । मान्यता है कि मन्दोदरी का जन्म राजस्थान के जोधपुर जिले में हुआ था । वहां पर आज भी महाराजा रावणजी को पुजा जाता है वहा आज भी रावण की चावरी है, जिस जगह पर रावण का विवाह हुआ था । रावण के तीन भाई थे जो एक ही माता की सन्तान थे वे हैं कुम्भकर्ण और विभीषण हालाँकि पाराशर संहिता और अद्भुत रामायण के अनुसार रावण का शतानन रावण या सहस्त्रानन नाम का एक बड़ा भाई और कुम्भकर्ण और विभीषण नामक दो छोटे भाई थे।पाराशर संहिता और अद्भुत रामायण के अनुसार सहस्त्रानन का वध भद्रकाली रूप में माता सीता द्वारा किया गया था।
इनकी पराजय श्रीराम, हनुमान और लक्ष्मण के हाथो कइ बार हुई है| ७ और ८ दिन इन्हे राम से जीवनदान मिला था सूर्यास्त होने के कारण| मामुली लुटेरो से भी रावण को पराजय मिली थी| अंगद ने अकेले ही इन्हे अपनी पुंछ मे बाँध लिया था|
पद्मपुराण, श्रीमद्भागवत पुराण, कूर्मपुराण, रामायण, महाभारत, आनन्द रामायण, दशावतारचरित आदि ग्रंथों में रावण का उल्लेख हुआ है। रावण के उदय के विषय में भिन्न-भिन्न ग्रंथों में भिन्न-भिन्न प्रकार के उल्लेख मिलते हैं।
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