राहीबाई सोमा पोपेरे (सीड मदर)
भारतीय किसान, कृषिविशेषज्ञ और संरक्षणवादी
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मुख्य बातें
- राहीबाई सोमा पोपेरे जो सीड मदर के नामसे भी जानी जाती है, एक भारतीय महिला किसान और संरक्षणवादी है। ये 2020 मे राष्ट्रपती के हातो पद्मश्रीसे नवाजी गई है। यह अहमदनगर जिल्हेके कोंभाळणे, ता.
- आदिवासी परिवारकी महिलाजो अपनी खेतीसे पूरे देशका ध्यान अपनी ओर खिंचती हुई इन्होने अपने बेमिसाल हौसंलेके बुनियाद पर अपनेही गाँवके 3500 महिलाओंको खेतीसे जोडकर अपने पैरो पर खडा रहेनेकी ताकददी अपने दुखदर्द भूलकर जिंदगीके इमारतकी नींव रची.
- घरके चक्कीमें आटा पिसना, चावल छडना, खेतोमें जाना, घरके सामनेके तालाबसे सरपे पानी लाना लेकिन उन्हे कभी थकान महेसूस नहीं हुई क्योंकी वह गावरान चावल,गावरान सब्जीयाँ, वारली, वरई, कालेचावल, सावा, धानवाली भगर यह सारी चीजे खानेसे वह शाम तक दणदण काम करतीथी.
- वो कहेतीहै गावरान अनाज खानेसे शरीरमें शक्ती बनी रहेतीहै हायब्रीड खानेसे शरीरमें शक्ती कम होतीहै और बिमारीयाँ बडतीहै.
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Source summary
Wikipediaराहीबाई सोमा पोपेरे जो सीड मदर के नामसे भी जानी जाती है, एक भारतीय महिला किसान और संरक्षणवादी है। ये 2020 मे राष्ट्रपती के हातो पद्मश्रीसे नवाजी गई है। यह अहमदनगर जिल्हेके कोंभाळणे, ता.अकोले तालुक यहांकी रहेनेवाली है। ‘बायस’ संस्थानने इन्हे साथ दी और कुछ बचतगटकी महिलांओको लेकर "कळसूबाई बीजसंवर्धन समिती" स्थापन की इसकी संस्थापक खुद राहीबाई बनी।
राहीबाई आदीवासी गरीब महीला जो पढी लिखी नहीं है क्रषी वैज्ञानिकभी उनके खेतीबाडीके ज्ञानका सम्मान करतेहै जैविक खेतीके लिए उन्हे सन्मानित किया गयाहै.
राहीबाई पुराणी पद्धतीकी तकनीकीको ध्यानमे रखकर जैविक खेतीको एक नया आयामदे रहीहै इन्होने 50 एकडसेभी ज्यादा भूसंरक्षणकी उसमें कई तरहकी सब्जीयाँ और धान ऊगानेका काम कियाहै राहीबाईका एक सीड बँकभीहै जिसमे वह पके हुए बीजोंको सुरक्षित रखतीहै यह बींज किसानोको कम सींचाईमें अच्छी फसल देतेहै.
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