विष्णु सहस्रनाम
विष्णु देव के हजार नामों से युक्त एक स्तोत्र
GlyphSignal keeps some article pages out of search while editorial context is expanded.
यह क्यों ट्रेंड कर रहा है
Interest in “विष्णु सहस्रनाम” spiked on Wikipedia on 2026-06-03.
When a Wikipedia article trends this sharply, it usually reflects a noteworthy real-world event—whether breaking news, a cultural milestone, or a viral discussion driving collective curiosity.
GlyphSignal tracks these patterns daily, turning raw Wikipedia traffic data into a curated feed of what the world is curious about. Every spike tells a story.
Source note: This page combines GlyphSignal analysis with attributed reference material from Wikipedia. GlyphSignal adds trend context, traffic history, categorization, and editorial interpretation. See how we build these pages.
Source summary
Wikipediaविष्णु सहस्रनाम भगवान विष्णु के हजार नामों से युक्त एक प्रमुख स्तोत्र है। यह सनातन धर्म में सबसे पवित्र तथा प्रचलित स्तोत्रों में से एक है। महाभारत में उपलब्ध विष्णु सहस्रनाम इसका सबसे लोकप्रिय संस्करण है। पद्म पुराण,मत्स्य पुराण और गरुड पुराण में इसका एक और संस्करण उपलब्ध है। प्रत्येक नाम विष्णु के अनगिनत गुणों में से कुछ गुणों को सूचित करता है। कई हिंदु परिवारों मे पूजन के समय इसका पठन करते है। सच्चे मन से इसके सुनने या पठन से मनुष्य की मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।
अनुशासनपर्व (महाभारत) के १४९ वें अध्याय के अनुसार, कुरुक्षेत्र मे बाणों की शय्या पर लेटे पितामह भीष्म ने युधिष्ठिर को इसका उपदेश दिया था।
कुरुक्षेत्र युद्ध मे हुई विनाश देख धर्मराज युधिष्ठिर विचलित हुए। बाणों की शय्या पर लेटे भीष्म भी अपने प्राण त्यागने की प्रतीक्षा करते थे। समय उचित पाकर भगवान वेदव्यास और श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को समाकालीन सर्वोच्च ज्ञानी भीष्म से धर्म व नीति के विषय मे उपदेश लेने की प्रेरणा दी। अपने सभी भाई समेत कृष्ण को साथ लिए युधिष्ठिर पितामह भीष्म के पास पहुँच कर उनका नमन किया और धर्म व नीति के विषय मे विचार करते किए प्रश्न व भीष्म का विवरण सहित उत्तर ही यह सहस्रनाम स्तोत्र है।
Content sourced from Wikipedia under CC BY-SA 4.0