शरत्चन्द्र चट्टोपाध्याय
भारतीय बंगाली लेखक
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Wikipediaशरतचन्द्र चट्टोपाध्याय (१५ सितम्बर, १८७६ - १६ जनवरी, १९३८) बांग्ला के सुप्रसिद्ध उपन्यासकार एवं लघुकथाकार थे। वे बांग्ला के सबसे लोकप्रिय उपन्यासकार हैं। उनकी अधिकांश कृतियों में गाँव के लोगों की जीवनशैली, उनके संघर्ष एवं उनके द्वारा झेले गए संकटों का वर्णन है। इसके अलावा उनकी रचनाओं में तत्कालीन बंगाल के सामाजिक जीवन की झलक मिलती है। शरतचंद्र भारत के सार्वकालिक सर्वाधिक लोकप्रिय तथा सर्वाधिक अनूदित लेखक हैं।
उनका जन्म हुगली जिले के देवानन्दपुर में हुआ। वे अपने माता-पिता की ९ सन्तानों में से एक थे। उनका बाल्यकाल देवानन्दपुर में तथा कैशोर्य भागलपुर में व्यतीत हुआ। घर में बच्चों का ठीक-ठीक शासन नहीं हो पाता था। पाँच वर्ष की अवस्था में ही देवानन्दपुर के 'प्यारी पंडित की पाठशाला' में प्रवेश कराया। भागलपुर में शरतचन्द्र का ननिहाल था। नाना केदारनाथ गांगुली का आदमपुर में अपना मकान था और उनके परिवार की गिनती खाते-पीते सभ्रांत बंगाली परिवार के रूप में होती थी। नाना कई भाई थे और संयुक्त परिवार में एक साथ रहते थे। इसलिए मामा तथा मौसियों की संख्या काफी थी। छोटे नाना अघोरनाथ गांगुली का बेटा मणिन्द्रनाथ उनका सहपाठी था।
पिता मतिलाल बेफिक्र स्वभाव के थे और किसी नौकरी में टिक पाना उनके वश की बात की बात नहीं थी। परिणामस्वरूप परिवार गरीबी के गर्त में चला गया और उन्हें बाल बच्चों के साथ देवानन्दपुर छोड़कर अपने ससुराल में (भागलपुर) रहना पड़ा। इस कारण शरत्चन्द्र का बचपन भागलपुर में गुजरा और पढ़ाई-लिखाई भी यहीं हुई।
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