सांप्रदायिक एवं लक्ष्य केन्द्रित हिंसा निवारण अधिनियम
GlyphSignal keeps some article pages out of search while editorial context is expanded.
यह क्यों ट्रेंड कर रहा है
Interest in “सांप्रदायिक एवं लक्ष्य केन्द्रित हिंसा निवारण अधिनियम” spiked on Wikipedia on 2026-07-21.
When a Wikipedia article trends this sharply, it usually reflects a noteworthy real-world event—whether breaking news, a cultural milestone, or a viral discussion driving collective curiosity.
GlyphSignal tracks these patterns daily, turning raw Wikipedia traffic data into a curated feed of what the world is curious about. Every spike tells a story.
Source note: This page combines GlyphSignal analysis with attributed reference material from Wikipedia. GlyphSignal adds trend context, traffic history, categorization, and editorial interpretation. See how we build these pages.
Source summary
Wikipediaसांप्रदायिक और लक्ष्यित हिंसा निवारण विधेयक भारत का 2011 में कांग्रेस सरकार द्वारा लाया गया एक विधेयक था जो की पूरी होने की प्रक्रिया में थी। इस अधिनियम का प्रारूप संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की अध्यक्षा श्रीमती सोनिया गाँधी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय सलाहकार परिषद् के द्वारा तैयार किया गया
प्रमुख राजनैतिक दल भारतीय जनता पार्टी, शिवसेना आल इण्डिया आन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (AIADMK) तथा तृणमूल कांग्रेस सहित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, विश्व हिन्दू परिषद् जैसे कई सामाजिक संगठन इस विधेयक का इस आधार पर विरोध कर रहे थे की यह अधिनियम केवल अल्पसंख्यकों को सुरक्षा प्रदान करता है परन्तु अल्पसंख्यकों के आक्रमण से पीड़ित बहुसंख्यकों को यह अधिनियम कोई सुरक्षा प्रदान नहीं करता है। इस प्रकार यह अधिनियम मुस्लिमों के हाथों में हिन्दुओं के विरुद्ध एक शस्त्र के भाँती कार्य करेगा तथा यह भारत के संघीय ढांचे के लिए हानिकारक सिद्ध होगा। ऐसा सोचना था भारतीय जनता पार्टी, शिवसेना आल इण्डिया आन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (AIADMK) तथा तृणमूल कांग्रेस सहित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, विश्व हिन्दू परिषद् जैसे कई दलों का।
इस विधेयक को सर्वप्रथम मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की सरकार ने 2005 में लागू करने का प्रयास किया था परन्तु भारी विरोध को देखते हुए सरकार ने इसे वापस ले लिया था। 2011 में पुनः सरकार इस विधेयक को कुछ संशोधनों के साथ लाया गया था जिसके अंतर्गत अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति के लोगों को भी इस विधेयक के अंतर्गत लाया गया था। परन्तु इस विधेयक के विरोधियों का कहना था कि यदि कोई सांप्रदायिक हिंसा मुस्लिमों और अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजातियों के मध्य होती, तो उस स्थिति में यह विधेयक मुस्लिमों का साथ देता और इस प्रकार दलितों की रक्षा के लिए बना हुआ
Content sourced from Wikipedia under CC BY-SA 4.0