सोवियत संघ का विघटन
सोवियत संघ का पतन
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Wikipediaसोवियत संघ, २६ दिसम्बर १९९१ को विघटित घोषित हुआ। इस घोषणा में सोवियत संघ के भूतपूर्व गणतन्त्रों को स्वतन्त्रत मान लिया गया। विघटन के पूर्व मिखाइल गोर्वाचेव , सोवियत संघ के राष्ट्रपति थे। विघटन की घोषणा के एक दिन पूर्व उन्होने पदत्याग दिया था। विघटन की इस प्रक्रिया आरम्भ आम तौर पर गोर्वाचेव के सत्ता ग्रहण करने के साथ जोड़ा जाता है। वास्तव में सोवियत संघ के विघटन की प्रक्रिया बहुत पहले शुरू हो चुकी थी। सोवियत संघ के निपात के अनेक बुनियादी एवं ऐतिहासिक कारण हैं जो सतही नजर डालने पर नहीं दिखते।
1917 में बोल्शेविक क्रांति ने सोवियत संघ नामक एक नए साम्यवादी राज्य को जन्म दिया। इसी के साथ सोवियत संघ ने आरंभ में ही स्पष्ट कर दिया कि राजनीतिक व्यवस्था और साम्यवादी संगठन समाजवादी विचारधारा पर आश्रित होगे तथा साम्यवादी मार्क्सवादी विश्व दर्शन ही राष्ट्रहित को परिभाषित करने की एक मात्र कसौटी होगा। यह स्वाभाविक था कि इस क्रांतिकारी साम्यवादी राज्य को पूँजीवादी पश्चिमी राज्यों ने अपना जन्मजात शत्रु समझा।
1920 एवं 30 के दशक में लेनिन की मृत्यु के बाद स्टालिन ने अपने को सर्वोच्च नेता के रूप में स्थापित किया और उस देश में साम्यवादी पार्टी की तानाशाही स्थापित हो गई। स्टालिन ने अपने विरोधियों का बर्बरता से उन्मूलन व दमन किया। इस कारण सोवियत संघ की पहचान जनतंत्र का हनन करने वाले एक राज्य के रूप में होने लगी। आगे स्टालिन की मृत्यु के बाद भी खुश्चेव तथा ब्रेजनेव के शासन में तानाशाही प्रवृत्तियाँ मौजूद रही। नागरिक स्वतंत्रता, प्रशासन, विदेश यात्रा आदि पर प्रतिबंध जारी रहे। एक तरीके से लोक भावना पर "लोहे के पर्दे" (iron curtain) डाल दिए गए थे।
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