GlyphSignal
हल्दीघाटी का युद्ध

हल्दीघाटी का युद्ध

1576 में अकबर और महाराणा प्रताप के बीच युद्ध

2 मिनट पढ़ें
Reviewed by GlyphSignal·Updated 2026-07-20·Methodology·Disclosure·Source·Contact

GlyphSignal keeps some article pages out of search while editorial context is expanded.

यह क्यों ट्रेंड कर रहा है

Interest in “हल्दीघाटी का युद्ध” spiked on Wikipedia on 2026-07-20.

When a Wikipedia article trends this sharply, it usually reflects a noteworthy real-world event—whether breaking news, a cultural milestone, or a viral discussion driving collective curiosity.

GlyphSignal tracks these patterns daily, turning raw Wikipedia traffic data into a curated feed of what the world is curious about. Every spike tells a story.

2026-06-21शिखर: 3642026-07-20
30-दिन कुल: 7,628

Source note: This page combines GlyphSignal analysis with attributed reference material from Wikipedia. GlyphSignal adds trend context, traffic history, categorization, and editorial interpretation. See how we build these pages.

Source summary

Wikipedia

हल्दीघाटी का युद्ध 18_21 जून 1576 को मेवाड़ के महाराणा प्रताप का समर्थन करने वाले घुड़सवारों,धनुर्धारियों, का समर्थन प्राप्त हुआ। राणा की सेना और मुगल सम्राट अकबर की सेना के बीच लड़ा गया था जिसका नेतृत्व आमेर के राजा मान सिंह प्रथम ने किया था। अकबर की सेना सँख्या महाराणा प्रताप की सेना से चार गुना अधिक थी। इस युद्ध में महाराणा प्रताप को भील जनजाति का भी सहयोग मिला। मुगल सेना में मान सिंह सहित कई सेनापति थे फिर भी महाराणा प्रताप के आगे मुगल टिक न सके, और मैदान छोड़कर भाग गए.।

चारण रामा जी सांदू महाराणा प्रताप की सेना के सेनानायक के रूप में हल्दी घाटी के युद्ध मे उपस्थित थे । उन्होंने बड़ी वीरता से युद्ध किया तथा मुगल सेना को सर्वाधिक क्षति पहुचाने वाले दल के सेना नायक थे ।

1568 में चित्तौड़गढ़ की विकट घेराबंदी ने मेवाड़ की उपजाऊ पूर्वी बेल्ट को मुगलों को दे दिया था। हालाँकि, बाकी जंगल और पहाड़ी राज्य अभी भी राणा प्रताप के नियंत्रण में थे। मेवाड़ के माध्यम से अकबर गुजरात के लिए एक स्थिर मार्ग हासिल करने पर आमादा था; लेकिन महाराणा प्रताप की प्रबल शक्ति के कारण कभी आगे नहीं बढ़ पाया जब 1572 में प्रताप सिंह को राजा (राणा) का ताज पहनाया गया, तो अकबर ने कई दूतों को भेजा, और महाराणा प्रताप को इस क्षेत्र के कई अन्य राजपूत नेताओं की तरह एक जागीरदार बनाने का प्रस्ताव दिया। लेकिन महाराणा प्रताप ने अकबर के प्रस्ताव को व्यक्तिगत रूप से स्वीकार करने से इनकार कर दिया, तो युद्ध अपरिहार्य हो गया। लड़ाई का स्थल राजस्थान के गोगुन्दा के पास हल्दीघाटी में एक संकरा पहाड़ी दर्रा था। 18 जून 1576 को महाराणा प्रताप ने लगभग 1900 घुड़सवारों,पैदलों एवं 1,000 भील धनुर्धारियों के बल को मैदान में उतारा। दूसरी ओर मुगलों का नेतृत्व आमेर के राजा मान सिंह ने किया था, जिन्होंने लगभग 5,000 योद्धाओं की सेना की कमान संभाली थी। तीन दिन तक चले युद्ध में निर्णायक जीत नहीं हुई

Read full article on Wikipedia →

Content sourced from Wikipedia under CC BY-SA 4.0

शेयर

Keep Reading

2026-07-20
1
धर्मेन्द्र प्रधान एक भारतीय राजनीतिज्ञ तथा वर्तमान में भारत सरकार के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस तथा...
26,540 दृश्य
धर्मेंद्र प्रधान
2
सोनम वांगचुक भारत के एक अभियन्ता, नवाचारी और शिक्षा सुधारक हैं। वह छात्रों के एक समूह द्वारा 1988 मे...
16,182 दृश्य
सोनम वांगचुक
3
रामायण एक आगामी भारतीय महाकाव्य फिल्म है, जिसके निर्माता नमित मलहोत्रा हैं और जिसका निर्देशन नितेश त...
14,477 दृश्य
रामायणम् (2026 फिल्म)
5
अल्अमीन जमाल नस्रावी ईबाना ये कैटलोनिया के एक स्पेनिश पेशेवर फुटबॉलर हैं, जो ला लीगा क्लब बार्सिल...
4,086 दृश्य
लामिन यमल
6
कॉकक्रोच जनता पार्टी एक भारतीय व्यंग्यात्मक राजनीतिक आंदोलन है, जिसकी स्थापना 16 मई 2026 को अभिजीत द...
3,468 दृश्य
कॉकरोच जनता पार्टी
7
दिल्ली का जन्तर मन्तर एक खगोलीय वेधशाला है। अन्य चार जन्तर मन्तर सहित इसका निर्माण महाराजा जयसिंह द्...
3,236 दृश्य
जंतर मंतर, दिल्ली
8
ॐ नमः शिवाय हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण मन्त्र है। नमः शिवाय का अर्थ "भगवान शिव को नमस्कार" या "उस ...
1,716 दृश्य
Continue reading: